Purnima Kab Hai

पूर्णिमा कब है?

विषय: पूर्णिमा कब है?
माह: हिंदी
लेखक: एक अनुभवी सामग्री लेखक

पूर्णिमा, हिंदी कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पर्व और तिथि है जो हर मासिक चंद्रमा के अंत में आती है। यह एक पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली तिथि है जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस लेख में हम इस पर्व के पीछे के इतिहास, महत्व, और पूर्णिमा के विभिन्न रूपों के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे।

धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए, पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है। यह तिथि विभिन्न देवताओं और देवीयों के प्रतिनिधित्व में है और इसे विशेष पूजाओं और अर्चना के साथ मनाया जाता है। पूर्णिमा का आयोजन देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा का एक उच्चारण है और इसे भगवान विष्णु, भगवान शिव, देवी दुर्गा, और अन्य देवी-देवताओं के साथ जोड़ा जाता है।

पूर्णिमा की प्रमुख रूपरेखा
पूर्णिमा के रूपों में कई प्रमुख नाम हैं जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख रूपों को निम्नलिखित अनुसार देखा जा सकता है:

  1. कार्तिक पूर्णिमा: यह पूर्णिमा अक्टूबर-नवंबर माह में पड़ती है और हिंदी कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा कही जाती है। यह पूर्णिमा हिन्दूओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसे दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर लोग दीपक, माला, और पूजा सामग्री को सजाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

  2. वैशाख पूर्णिमा: इस पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और यह अप्रैल-मई माह में पड़ती है। इसे बैसाखी भी कहा जाता है और यह पूर्णिमा पंजाब और हिमाचल प्रदेश में खास रूप से मनाई जाती है। इस दिन लोग खेती से जुड़े रास्ते परचम उठाते हैं, गिद्ध नृत्य करते हैं, और भगवान सूर्य की पूजा करते हैं।

  3. श्रावण पूर्णिमा: यह पूर्णिमा जुलाई-अगस्त माह में पड़ती है और हिंदी कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा कही जाती है। यह पूर्णिमा श्रावण मास के शिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है और इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। श्रावण पूर्णिमा पर लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, बेल पत्र और धूप जलाते हैं, और शिवाजी की आरती गाते हैं।

  4. फाल्गुन पूर्णिमा: यह पूर्णिमा फरवरी-मार्च माह में पड़ती है। इसे होली के रूप में मनाया जाता है और यह भारत और विदेशों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा पर लोग रंगों से खेलते हैं, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं, और होली की परम्पराओं को आत्मसात करते हैं।

पूर्णिमा के वैभव और महत्व
पूर्णिमा को हिंदी कैलेंडर के मासिक चंद्रमा के अंत में मनाने का मुख्य कारण उसके वैभवमय महत्व है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूरी तरह से दिखाई देता है, जो इसे एक अत्यधिक शुभ और प्रभावशाली दिन बनाता है।

वैदिक साहित्य में पूर्णिमा को चंद्रमा की प्राचीनतम और महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। इसे मान्यता में रखते हुए, लोग इस दिन विशेष पूजाएँ और अर्चना करते हैं और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रार्थना करते हैं। पूर्णिमा पर किसी भी पूजा या अर्चना को करने का अवसर माना जाता है और इस दिन की खासता से उपवास करने की सलाह दी जाती है।

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की उज्जवलता सामान्यतः लोगों को एक आनंददायक और शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करती है। इस दिन लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करने के लिए मनोरंजन और मनोरंजान की गतिविधियों में भाग लेते हैं।

पूर्णिमा के रंग
पूर्णिमा के रंग हमारे देश में विभिन्न दिवसों और त्योहारों के साथ जुड़े हुए हैं। यह रंग, मस्ती, और धार्मिक उत्साह को दर्शाते हैं और लोगों को एक साथ बांधते हैं। पूर्णिमा का महत्वपूर्ण रंगों में से कुछ निम्नलिखित हैं:

  1. लाल रंग: लाल रंग प्रेम, प्रेम और प्यार का प्रतीक है। पूर्णिमा के दिन लोग होली मनाते हैं और इसमें लाल रंग का विशेष महत्व होता है। यह रंग लोगों को एक-दूसरे के प्रति प्रेम की भावना से जोड़ता है।

  2. पीला रंग: पीला रंग खुशियों, उत्साह, और उमंग का प्रतीक है। यह रंग विशेष रूप से बसंत पंचमी और गणेश चतुर्थी के दिन देखा जाता है।

  3. नीला रंग: नीला रंग अमरता, शांति, और स्थिरता का प्रतीक है। यह रंग ध्यान और धार्मिकता को प्रकट करता है और इसे जन्माष्टमी के दिन देखा जाता है।

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की उज्जवलता और रंगों की चमक को देखते हुए हमें यह याद दिलाता है कि हम सभी एक ही आकाश के नीचे बसते हैं और हमारे बीच में एकता और संगठन होना चाहिए।

समाप्ति
इस लेख में हमने पूर्णिमा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की है। हमने देखा कि पूर्णिमा एक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली तिथि है और इसे विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की उज्जवलता और रंगों की चमक को देखते हुए हमें यह याद दिलाता है कि हम सभी एक ही आकाश के नीचे बसते हैं और हमारे बीच में एकता और संगठन होना चाहिए।

पूर्णिमा के रंगों के साथ हमेशा जुड़े रहें, और इस आनंददायक और प्रभावशाली दिन की खुशियों को सभी के साथ बांटें।

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