Diwali Kab Hai

दिवाली कब है: आदित्य के उत्सव का आगमन

परिचय:
भारतीय साहित्य में नाम और यश कमाए हुए है, दिवाली उत्सव देशवासियों के द्वारा खुशी और धन लाभ की प्रतीक है। हर वर्ष आने वाली दिवाली के उत्सव ने भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को चिरस्थायी रूप से जोड़ दिया है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो अक्टूबर और नवम्बर के बीच आता है। इस वर्ष, दिवाली कब है? क्‍या दिवाली इस वर्ष बदल गई है? इन सभी प्रश्नों के जवाब और दिवाली के उत्सव के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पढ़ें।

दीपावली का अर्थ:
दीपावली शब्द संस्कृत शब्द दीपावलि (दीप + आवलि) से निकला है, जिसका अर्थ होता है दीपों की पंक्ति। इसे तेल की बत्तियों द्वारा रौशनी देने का एक उत्सव कहा जाता है। यह प्रमुखता सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों में संग्रहीत है, जहां इस उत्सव को बारीकी से मनाया जाता था। दीपावली का उत्सव दिव्यांगों के लिए एक ख़ास महत्वगाथा है, क्योंकि इसे उनकी रौशनी के लिए एक विशेष रूप से मनाया जाता है।

दिवाली के प्रकार:
दिवाली के उत्सव में विभिन्न प्रकार के उपन्यासों, कथाओं, और ग्रंथों में वर्णित किए गए हैं। यहां कुछ प्रमुख दिवाली के प्रकार हैं:

  1. दिवाली पटाके और आतिशबाज़ी: दिवाली के उत्सव में पटाके और आतिशबाज़ी ख़ास रौशनी और धूमधाम का हिस्सा है। लोग अपने घरों के आसपास वायस्तविक और आकर्षक आतिशबाज़ी का आयोजन करते हैं। इससे आसमान रंगों से भर जाता है और लोग अपने मनोहारी दृश्यों का आनंद लेते हैं।

  2. दीपों की सजावट: दीपावली के उत्सव में लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं। यह एक प्रतीक है कि अंधकार को दूर भगाने के लिए रौशनी को आमंत्रण किया जाता है। संगीत, नृत्य, और मिठाई का पर्व भी इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  3. लक्ष्मी पूजा: दिवाली के दूसरे दिन, लोग लक्ष्मी देवी की पूजा करते हैं। इस दिन, लक्ष्मी देवी का आगमन माना जाता है, जिससे घर के अंदर धन और समृद्धि की बरक्कत आती है। धार्मिक रूप से, लक्ष्मी पूजा को माता सरस्वती और गणेश चतुर्थी के साथ मनाने का सुझाव दिया जाता है।

  4. भैया दूज: दिवाली के अंतिम दिन, भाई-बहन के प्यार और बंधन का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक करती हैं और उन्हें मिठाई खिलाती हैं। इस तरह का रिश्ता भाई-बहन के प्यार को दर्शाता है और परिवार के आपसी बंधन को मजबूत करता है।

दिवाली का महत्व:
दिवाली का उत्सव हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह उत्सव बनारस, आयोध्या, मथुरा, और दिल्ली जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसे भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा विदेशों में भी विदेशी भारतीय समुदायों द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है।

दिवाली के शुभ मुहूर्त:
दिवाली का महत्वपूर्ण हिस्सा शुभ मुहूर्त होता है, जहां लोग शुभ कार्यों का आरंभ करते हैं। शुभ मुहूर्त दिवाली के आगमन की तारीख और समय के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इससे पहले लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, और उन्हें दीपों और फूलों से सजाते हैं।

वर्ष 2021 में दिवाली कब है?
वर्ष 2021 में, दिवाली का उत्सव 4 नवम्बर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इसे अक्टूबर और नवम्बर के बीच की अमावस्या पर मनाया जाएगा। इस वर्ष, दिवाली की ख़ास तारीख नवम्बर 4, 2021 है।

दिवाली की कहानी:
दिवाली के आगमन की कहानी विभिन्न धार्मिक और पौराणिक कथाओं के माध्यम से सुनाई जाती है। इन कथाओं में से एक कथा है रामायण की, जिसमें प्रभु श्रीराम अयोध्या से वनवास जाते हैं और दशरथ जी का पुत्र कहानी की गहरी सच्चाई का सामर्थ्य प्रदर्शित करते हैं। दिवाली का उत्सव इस मुख्य कथा के आधार पर मनाया जाता है, जहां भगवान राम के अयोध्या लौटने के बाद उनके लिए नगर की रोशनी प्रदान की जाती है।

दिवाली के बदलते रूप:
दिवाली अपने चलते बदलते रूप में विख्यात है। वर्षों के बाद, इस उत्सव का मुख्य आयोजन और अभिनय विभिन्न रंग, प्रदर्शनी और नगर की रौशनी के नए तरीकों में होता है। दिवाली के उत्सव को आधुनिकता का उत्सव कहा जा सकता है, जहां आधुनिक दौर के माध्यमों का उपयोग करके आयोजन किया जाता है। इसके अंतर्गत, लोग दिवाली के दौरान ई-कार्ड, वॉलपेपर, ई-मेल, और सोशल मीडिया पर दिवाली की शुभकामनाएं भेजते हैं।

संक्षेप में:
दिवाली एक प्रमुख हिंदू धार्मिक उत्सव है जो भारत और दुनिया भर में धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव आने वाले वर्ष में 4 नवम्बर, 2021 को मनाया जाएगा। दिवाली के उत्सव में आतिशबाज़ी, दीपों की सजावट, लक्ष्मी पूजा, और भाई-बहन के प्यार का उत्सव शामिल हैं। यह उत्सव अपने बदलते रूप में प्रमुख रंगों, प्रदर्शनी, और आयोजनों के लिए भी प्रसिद्ध है।

अब आपको पता है कि दिवाली कब है। इस दिवाली के उत्सव को अपने परिवार और मित्रों के साथ धूमधाम के साथ मनाएं और इस खास मौके का आनंद उठाएं। दिवाली के इस उत्सव को धन, समृद्धि, और ख़ुशी के साथ आपके जीवन में नई उमंग और उज्ज्वलता लाएं।

धन्यवाद।